क्या आप अपने एम्प्लॉयर से मिलने वाले दिवाली गिफ्ट का इंतजार कर रहे हैं, या आपको पहले ही कोई गिफ्ट मिल चुका है? जश्न मनाने से पहले, यह जरूर समझ लें कि इस पर टैक्स के क्या नियम लागू होते हैं. एम्प्लॉयर से मिलने वाले गिफ्ट एक तय सीमा तक टैक्सफ्री हो सकते हैं, लेकिन बोनस पर पहले रुपए से ही टैक्स लगता है.

इन दोनों के बीच का यह अंतर आपकी टैक्स लायबिलिटी पर बड़ा असर डाल सकता है. इनकमटैक्स एक्ट, 2025, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ और जिसने इनकमटैक्स एक्ट, 1961 की जगह ली है, उसने एम्प्लॉयर से मिलने वाले गिफ्ट के लिए सालाना टैक्सफ्री सीमा को 5,000 रुपए से बढ़ाकर ₹15,000 कर दिया है.

इस पर नहीं लगेगा टैक्स

सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर एसआर पटनायक ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि यह छूट टैक्स ईयर 202627 से लागू है. 15,000 रुपए की इस गिफ्ट छूट सीमा में नॉनकैश गिफ्ट, वाउचर और टोकन शामिल हैं. इसमें फिजिकल गिफ्ट के साथसाथ ऐसे डिजिटल गिफ्ट कार्ड भी आते हैं, जिनसे सामान या सर्विसेज ली जा सकती हैं. शर्त बस यह है कि टैक्स ईयर के दौरान इन सभी गिफ्ट की कुल वैल्यू 15,000 रुपए से कम होनी चाहिए. कर्मचारी के परिवार के सदस्यों को दिए गए गिफ्ट भी इसमें शामिल हैं.

क्या कहते हैं नियम?

अगर गिफ्ट की कुल वैल्यू ₹15,000 तक पहुंच जाती है या उससे ज्यादा हो जाती है, तो पूरी रकम पर टैक्स लगेगा. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। पटनायक ने रिपोर्ट में कहा कि इनकमटैक्स रूल्स, 2026 के नियम 15 के अनुसार, जब किसी टैक्स ईयर में सभी गिफ्ट की कुल वैल्यू 15,000 से कम होती है, तभी इन गिफ्ट की वैल्यू को ‘शून्य’ माना जाएगा. इसलिए, सावधानी के तौर पर यह कहा जा सकता है कि अगर कुल वैल्यू 15,000 या उससे ज्यादा हो जाती है, तो सभी गिफ्ट की पूरी वैल्यू कर्मचारी की सैलरी का हिस्सा मानी जाएगी और उस पर टैक्स लगेगा.

उदाहरण के लिए, अगर आपका एम्प्लॉयर आपको दिवाली पर 10,000 रुपए की कीमत वाला मोबाइल फोन देता है और उसी टैक्स ईयर में आपको 4,000 का कोई और गिफ्ट मिलता है, तो कुल 14,000 की वैल्यू टैक्सफ्री रहेगी. लेकिन अगर कुल वैल्यू 15,000 रुपए तक पहुंच जाती है या उससे ज्यादा हो जाती है, तो पूरी रकम पर टैक्स लगेगा.

उपहार या बोनस?

दीवाली के दौरान मिलने वाला हर भुगतान ‘उपहार’ नहीं माना जाता. कैश पेमेंट, जिसमें दीवाली बोनस भी शामिल है, को आमतौर पर वेतन माना जाता है और उस पर उसी हिसाब से टैक्स लगता है.पटनायक ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि अगर employer की तरफ से बिना किसी शर्त के कैश गिफ्ट दिया जाता है, तो वह भी इसी सीमा के दायरे में आएगा. लेकिन अगर यह दीवाली बोनस या प्रोफेशनल बोनस के रूप में मिलता है, तो यह 15,000 रुपए की सीमा में नहीं आएगा. ऐसे मामले में, पहली रकम से ही इसे वेतन माना जाएगा और इस पर 100% टैक्स लगेगा.

टीडीएस का पेंच

टैक्स के नियमों से यह भी तय होता है कि employer को स्रोत पर टैक्स काटना है या नहीं. अगर उपहारों की कुल कीमत 15,000 रुपए से कम है, तो employer को TDS काटने की जरूरत नहीं होती. लेकिन अगर यह कीमत 15,000 रुपए से ज्यादा हो जाती है, तो TDS काटना जरूरी हो जाता है.

वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि अगर employer की तरफ से 15,000 रुपए से ज्यादा का गिफ्ट मिलता है, तो कर्मचारी को उस पर टैक्स देना होगा. इसे कर्मचारी की सैलरी का ही हिस्सा माना जाएगा. ऐसे उपहारों पर employer को TDS काटना होता है, जिसे आमतौर पर कर्मचारी के हर महीने मिलने वाले वेतन से एडजस्ट कर लिया जाता है.

कर्मचारी यह चेक कर सकता है कि गिफ्ट की रकम को उसके फॉर्म 130 में उसकी इनकम के तौर पर शामिल किया गया है या नहीं, और employer ने उस पर सही तरीके से टैक्स काटा है या नहीं. टैक्स ईयर 202627 और उसके बाद के वर्षों के लिए, 1 अप्रैल 2026 से ‘फॉर्म 16’ की जगह ‘फॉर्म 130’ लागू कर दिया गया है.

रिबेट का जाल

जो कर्मचारी छूट की सीमा के भीतर नॉनकैश गिफ्ट पाते हैं, उन्हें किसी अतिरिक्त टैक्स के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है. लेकिन जिन्हें कैश बोनस मिलता है, उन्हें यह देखना चाहिए कि इस पेमेंट से उनकी कुल टैक्सेबल इनकम पर क्या असर पड़ता है.यह बात उन सैलरीड लोगों के लिए खास तौर पर अहम है, जिनकी सालाना कमाई न्यू टैक्स रिजीम के तहत लगभग 12.75 लाख रुपए है.

धारा 87A के तहत, जिन रेजिडेंट टैक्सपेयर्स की टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपए तक है, वे टैक्स में छूट का क्लेम कर सकते हैं. इससे उनका टैक्स बोझ शून्य हो जाता है. सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए, 75,000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू होने पर, बिना किसी अन्य आय वाले कर्मचारियों के लिए ग्रॉस सैलरी की सीमा 12.75 रुपए लाख हो जाती है.

समझें पूरा टैक्स का गणित

मान लीजिए कि किसी कर्मचारी की सालाना सैलरी 12.60 लाख रुपए है. 75,000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद, टैक्सेबल इनकम 11.85 लाख रुपए रह जाती है, जो 12 लाख की छूट सीमा के दायरे में आती है. अब, अगर कर्मचारी को 50,000 रुपए का दिवाली बोनस मिलता है, तो ग्रॉस सैलरी बढ़कर 13.10 लाख रुपए और टैक्सेबल इनकम 12.35 लाख रुपए हो जाएगी. ऐसे में, कर्मचारी धारा 87A के तहत मिलने वाली पूरी छूट के लिए पात्र नहीं रहेगा और उसे टैक्स देना होगा.

हेल्थ और एजुकेशन सेस को मिलाकर, कुल टैक्स 36,400 रुपए बनेगा. इसका मतलब यह हुआ कि टैक्स कटने के बाद, 50,000 रुपए का बोनस घटकर 13,600 रुपए रह जाएगा.इसलिए, भले ही दिवाली बोनस एक अतिरिक्त आर्थिक मदद जैसा लगे, लेकिन जिन कर्मचारियों की आय टैक्सफ्री सीमा के करीब है, उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इससे उन पर अतिरिक्त टैक्स लग सकता है. किसी गिफ्ट के विपरीत, बोनस कर्मचारी की इनकम को छूट की सीमा से ऊपर ले जा सकता है, जिससे उनका टैक्स का बोझ बढ़ सकता है.