CIBIL Score Tips: अक्सर लोग क्रेडिट कार्ड या लोन की ईएमआई चुकाते समय 500 या 1000 रुपये जैसे छोटे अमाउंट को नजरअंदाज कर देते हैं. कई बार लोग सोचते हैं कि इतनी छोटी रकम से उनकी वित्तीय स्थिति पर क्या ही फर्क पड़ेगा. लेकिन जब बात क्रेडिट हेल्थ की आती है, तो नियम बिल्कुल बदल जाते हैं. अगर आप भी छोटी बकाया रकम को हल्के में ले रहे हैं, तो सावधान होने का समय आ गया है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। एक छोटी सी लापरवाही आपके वित्तीय भविष्य पर भारी पड़ सकती है.

रकम नहीं बल्कि समय है अहम

क्रेडिट स्कोर की दुनिया में पेंडिंग बिल की रकम उतनी महत्वपूर्ण नहीं होती, जितनी कि देरी की अवधि. सबसे अहम बात ये है कि पेमेंट कितने दिनों से बकाया है. अगर पेमेंट में देरी आपकी आदत बन गई है, तो ये सीधे आपके क्रेडिट स्कोर को नीचे गिरा देगा. असल में आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री ही आपका वित्तीय भरोसा तय करती है. अगर इसमें कोई भी दाग लगता है, तो आपकी साख कम होने लगती है.

वीकली रिपोर्टिंग का बड़ा असर

भारत में मुख्य रूप से चार क्रेडिट ब्यूरो काम करते हैं ट्रांसयूनियन सिबिल, एक्सपीरियन, इक्विफैक्स व क्रिफ हाई मार्क. ये संस्थाएं 300 से 900 के बीच आपका स्कोर तय करती हैं. फाइबे के एमडी व ग्रुप सीईओ अक्षय मेहरोत्रा बताते हैं कि एक बार की देरी तुरंत स्कोर नहीं गिराती, बशर्ते उसे रिपोर्टिंग साइकिल के भीतर सुधार लिया जाए. लेकिन अब लेंडर्स हर हफ्ते क्रेडिट जानकारी अपडेट कर रहे हैं. ऐसे में अगर कोई भी पेमेंट बकाया है, तो वह बहुत जल्दी सिस्टम में दिखने लगती है. एआई टूल्स की मदद से अब लेंडर्स हर छोटी गतिविधि पर बारीक नजर रख रहे हैं.

बिल बाउंस होने के बाद करें 5 काम

अगर आपसे 500 रुपये के पेमेंट में चूक हो गई है, तो नुकसान से बचने के लिए तुरंत कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए.

  1. पहला कदम ये है कि बिना किसी देरी के अपना बकाया बिल तुरंत भर दें. इसे कल पर बिल्कुल न टालें.
  2. दूसरा, बिल भरने के बाद लेट फीस या पेनल्टी को जरूर चेक करें. अगर कोई अतिरिक्त चार्ज लगा है तो उसे भी तुरंत चुका दें.
  3. तीसरा काम ये है कि पेमेंट करने के बाद लेंडर के रिकॉर्ड में जाकर कन्फर्म करें कि आपका अकाउंट अपटूडेट हो गया है.
  4. चौथा जरूरी काम है अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को नियमित रूप से चेक करना. देखें कि कहीं कोई गलत एंट्री तो दर्ज नहीं हो गई है.
  5. पांचवां, भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए हमेशा ऑटोपे सिस्टम चालू रखें या कैलेंडर रिमाइंडर सेट करें.