बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी साथ लेकर आता है. आमतौर पर लोग सर्दी, खांसी और वायरल संक्रमण पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन इस मौसम में कान से जुड़ी परेशानियां भी तेजी से बढ़ती हैं. कान में दर्द, खुजली, पानी निकलना या सुनने में परेशानी जैसे लक्षण अक्सर लोग सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश के दौरान हवा में नमी बढ़ जाती है.

इसके अलावा, बारिश का पानी, गंदा पानी या लंबे समय तक कान में नमी बने रहने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं. यही वजह है कि इस मौसम में ईयर इंफेक्शन के मामले बढ़ जाते हैं.

बारिश के मौसम में कान का संक्रमण क्यों बढ़ जाता है?

डॉक्टर अभिनीत कुमार ने बताया कि कान के अंदर का हिस्सा बेहद सेंसिटिव होता है. जब कान में पानी चला जाता है और वह लंबे समय तक बाहर नहीं निकलता, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. स्विमिंग, बारिश में भीगना और गीले ईयरफोन का इस्तेमाल भी इसकी बड़ी वजह बन सकते हैं. कुछ लोगों में पहले से मौजूद एलर्जी, साइनस की समस्या या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती है.

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

कान में लगातार दर्द होना

खुजली होना

कान से पानी या पीले रंग का तरल निकलना

कान बंद होने जैसा महसूस होना

सुनने की क्षमता कम होना

कान के अंदर सूजन होना

बच्चों में चिड़चिड़ापन और बारबार कान पकड़ना

अगर ये लक्षण दो से तीन दिन से ज्यादा बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

क्या हर कान दर्द का मतलब संक्रमण होता है?

ऐसा जरूरी नहीं है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। कई बार कान में जमा मैल, गले का संक्रमण, साइनस या जबड़े की समस्या के कारण भी कान में दर्द हो सकता है. हालांकि, बारिश के मौसम में संक्रमण की संभावना अधिक रहती है. इसलिए बिना जांच के दवा लेने से बचना चाहिए.

कान में संक्रमण होने पर क्या न करें?

कान में माचिस की तीली, पिन या कोई नुकीली चीज न डालें.

डॉक्टर की सलाह के बिना ईयर ड्रॉप का इस्तेमाल न करें.

बारबार कान खुजलाने से बचें.

घरेलू नुस्खों के तौर पर तेल या कोई अन्य तरल पदार्थ कान में न डालें.

कान को सुरक्षित रखने के आसान उपाय

बारिश में भीगने के बाद कान को अच्छी तरह सुखाएं.

स्विमिंग के बाद कान में मौजूद पानी को बाहर निकालें.

गंदे ईयरफोन या ईयरबड का इस्तेमाल न करें.

कान की नियमित सफाई करें, लेकिन जरूरत से ज्यादा सफाई करने से बचें.