‘पति छात्र हो या बेरोजगार, पत्नी का गुजारा भत्ता अनिवार्य; हाईकोर्ट का आदेश!


चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पति अपनी पत्नी के गुजारा भत्ता की कानूनी जिम्मेदारी से केवल इस आधार पर मुक्त नहीं हो सकता कि वह छात्र है या आर्थिक रूप से कमजोर है। एक स्वस्थ और सक्षम व्यक्ति के लिए कमाई करना संभव है और पत्नी का भरण-पोषण करना उसका कानूनी दायित्व है।

यह टिप्पणी जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल की एकल पीठ ने एक 22 वर्षीय इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र की याचिका खारिज करते हुए की। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि पति का आय नहीं होने का तर्क केवल एक बहाना है, जिसे कानून में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता ने फरीदाबाद की फैमिली कोर्ट के अगस्त 2025 में पारित आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अपनी अलग रह रही पत्नी को 2500 प्रति माह अंतरिम गुजारा भत्ता देने के निर्देश दिए गए थे। मामले के अनुसार, दोनों की शादी जून 2020 में हुई थी, जब पति नाबालिग था और पत्नी 25 वर्ष की थी।

बाद में पति ने वर्ष 2023 में विवाह निरस्तीकरण के लिए याचिका दायर की, जिसके बाद पत्नी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग की। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि वह एक छात्र है और उसकी मां की 3000 की विधवा पेंशन पर ही पूरा परिवार निर्भर है।

उसने यह भी कहा कि पत्नी अपने मायके में रह रही है और उसके भाई कमाने वाले हैं, इसलिए उसे भरण-पोषण की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि गुजारा भत्ता का प्रविधान पति को दंडित करने के लिए नहीं, बल्कि पत्नी को दर-दर की ठोकरों और आर्थिक तंगी से बचाने के लिए बनाया गया है।

‘शून्य आय’ की दलील को नजरअंदाज करना सही
फैमिली कोर्ट द्वारा पति की ‘शून्य आय’ की दलील को नजरअंदाज करना सही ठहराते हुए अदालत ने कहा कि एक दिहाड़ी मजदूर भी आसानी से 12-13 हजार मासिक कमा सकता है। गुजारा भत्ता की राशि पर विचार करते हुए अदालत ने कहा कि महंगाई के इस दौर में 2500 प्रति माह की राशि भी पत्नी के बुनियादी जरूरतों के लिए मुश्किल से पर्याप्त है।

ऐसे में इसे कम करने का कोई आधार नहीं बनता। अंतत हाईकोर्ट ने पति की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और स्पष्ट संदेश दिया कि वैवाहिक संबंधों से उत्पन्न जिम्मेदारियों से कोई भी व्यक्ति बच नहीं सकता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *