
रियाद: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सऊदी अरब का अचानक दौरा किया है, जहां उन्होंने सऊदी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें की हैं। इस दौरान द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्रों की समीक्षा की गई और क्षेत्रीय हालात के ताजा घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। रियाद में भारतीय दूतावास ने इस बारे में जानकारी दी है। डोभाल का दौरा सऊदी अरब में पाकिस्तान के फाइटर जेट और सैनिकों के पहुंचने के ठीक बाद हुआ है।
विदेश मंत्री से मुलाकात
रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने X पर लिखा, ‘NSA अजीत डोभाल ने 19 अप्रैल को रियाद का आधिकारिक दौरा किया। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल अजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मुसाद अल-ऐबान से मुलाकात की।’ भारतीय मिशन ने इन मुलाकातों की तस्वीरें भी शेयर की हैं।
बयान में बताया गया कि चर्चाओं में दोनों देशों के आपसी हितों से जुड़े रणनीतिक और क्षेत्रीय मुद्दों की एक विस्तृत शृंखला शामिल थी। दूतावास ने कहा, बैठकों के दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिति और आपकी हितों के अन्य मुद्दों पर चर्चा की।
खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच दौरा
भारतीय NSA का सऊदी दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब ईरान को लेकर खाड़ी में एक बार फिर तनाव बढ़ रहा है। रविवार को ही अमेरिकी नेवी ने ईरान के एक मालवाहक जहाज को कब्जे में ले लिया जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश कर रहा था। ईरान ने इसे समुद्री डकैती बताते हुए बदला लेने की धमकी दी है। इस बीच एक बार फिर से युद्ध शुरू होने का खतरा मंडराने लगा है, क्योंकि मौजूदा युद्धविराम मंगलवार को खत्म हो रहा है।
सऊदी अरब में पाकिस्तानी फाइटर जेट की तैनाती
खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सऊदी अरब में अपने फाइटर जेट तैनात किए हैं। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर दोबारा युद्ध शुरू होता है और ईरान पिछली बार की तरह ही सऊदी ठिकानों पर हमले करता है तो क्या पाकिस्तान रियाद के लिए युद्ध लड़ेगा। पिछले साल सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता हुआ था, जिसमें कहा गया है कि किसी एक देश पर हमला दोनों पर आक्रमण माना जाएगा।
भारतीय NSA के सऊदी जाने के मायने
रियाद स्थित सऊदी-भारत संबंधों के जानकार सऊद हाफिज ने अजीत डोभाल के सऊदी अरब दौरे को एक संकेत बताया है। यह सिलसिला बताता है कि रियाद उन क्षेत्रीय बातचीत के लिए एक समन्यव केंद्र के तौर पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जिनके लिए गोपनीयता, बुनियादी ढांचे और भरोसेमंद राजनीतिक माध्यमों की जरूरत होती है। इस लिहाज से सऊदी अरब को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखा जा रहा है, जो सिर्फ किसी एक मुद्दे तक सीमित न रहकर, रिश्तों में निरंतरता बनाए रखने में मदद कर सकता है।