यूपी की राजधानी लखनऊ में नैनीताल बैंक की गोमतीनगर शाखा में करोड़ों रुपये के लोन घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है. बैंक की आंतरिक जांच में खुलासा हुआ है कि फर्जी दस्तावेज, फर्जी संपत्ति मालिक और संदिग्ध वैल्यूएशन रिपोर्ट के आधार पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक के लोन स्वीकृत किए गए. मामले में बैंक की शिकायत पर गोमतीनगर थाने में 34 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.

बैंक की जांच के अनुसार, जनवरी से मई 2025 के बीच 8 हाउसिंग लोन और एक कैश क्रेडिट लोन संदिग्ध परिस्थितियों में मंजूर किए गए. जांच में पाया गया कि लोन मंजूर कराने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और कई मामलों में वास्तविक संपत्ति मालिकों की जगह दूसरे लोगों को मालिक दिखाकर बैंक से लोन लिया गया.
लीगल रिपोर्ट में भी झोल
जांच के दौरान लीगल रिपोर्ट, वैल्यूएशन रिपोर्ट और मॉर्गेज प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. बैंक अधिकारियों के मुताबिक, कई दस्तावेजों में जानबूझकर गलत जानकारी दी गई, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ. प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि पूरी साजिश सुनियोजित तरीके से रची गई थी.
फर्जी डाॅक्यूमेंट्स से लिए करोड़ों के लोन
बैंक की आंतरिक जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। कुछ आरोपी अलगअलग लोन मामलों में गवाह के रूप में भी शामिल पाए गए. इससे आशंका जताई जा रही है कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का काम हो सकता है, जिसने फर्जी कागजात तैयार कर बैंक से करोड़ों रुपये का लोन हासिल किया.
9 लोन खाते फ्राॅड घोषित
घोटाले का खुलासा होने के बाद बैंक ने सभी नौ लोन खातों को फ्रॉड घोषित कर उन्हें एनपीए की श्रेणी में डाल दिया है. इसके बाद बैंक अधिकारियों ने गोमतीनगर थाने में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर 34 नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.



