न नल में पानी, न घर में बहू! जल संकट ने महोबा के इस गांव को बना दिया ‘कुंवारों का गांव’​

News Just Abhi Mahoba Water Crisis: सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार हर घर नल से जल पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन सरकार के यह दावे जमीनी हकीकत के विपरीत नजर आ रहे हैं. महोबा जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मुड़हरा गांव के वाशिंदे आज भी बूंदबूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. जिले का मुड़हरा गांव हर घर नल योजना के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है. गांव में बनी करोड़ों की पानी की टंकी और पाइपलाइन सिर्फ दिखावा बनकर रह गई हैं. हालात इतने बदतर हैं कि पानी के इस भीषण संकट के चलते गांव के तीन दर्जन से ज्यादा युवा शादी के इंतजार में बैठे हैं.

न नल में पानी, न घर में बहू! जल संकट ने महोबा के इस गांव को बना दिया ‘कुंवारों का गांव’​

भीषण गर्मी के दौरान हैरान और परेशान कर देने वाली तस्वीरें देश के सबसे पिछड़े इलाकों में शुमार महोबा जिले की सदर तहसील के मुड़हरा गांव में पानी के संकट को बयां कर रही हैं. कहने को तो सरकार ने यहां नमामि गंगे योजना के तहत पाइपलाइन बिछा दी, पानी की टंकी भी खड़ी कर दी, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को आज तक नसीब हुई तो सिर्फ पानी की टेस्टिंग.

टेस्टिंग के बाद से इन नलों ने पानी की एक बूंद तक नहीं उगली है. 2 हजार से ज्यादा आबादी वाला यह गांव आज भीषण गर्मी में सिर्फ तीन हैंडपंपों और एक मंदिर के कुएं के भरोसे जीने को मजबूर है. तीन में से दो हैंडपंपों का पानी इतना खारा है कि उसे पीना तो दूर, इस्तेमाल करना भी बीमारी को न्योता देना है. गांव के बाहर लगा एकमात्र हैंडपंप ही अब प्यास बुझाने का इकलौता जरिया है, जहां दिनभर बच्चे, महिलाएं और बुजुर्गों की लाइन लगी रहती है.

पानी संकट से अटकी शादियां

पानी के इस संघर्ष ने अब यहां के युवाओं का भविष्य भी दांव पर लगा दिया है. गांव में करीब 30 से 40 लड़के ऐसे हैं, जिनकी उम्र शादी की हो चुकी है, लेकिन पानी की किल्लत देखकर कोई भी पिता इस गांव में अपनी बेटी ब्याहने को तैयार नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि रिश्तेदार आते हैं तो उनके नहाने के लिए पानी नहीं होता, उन्हें तालाब भेजना पड़ता है.

महिला ने क्या कहा?

शादीब्याह के कार्यक्रमों में रुपये खर्च करके बाहर से पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। गांव की सुमित्रा, संतोषी और सुमन जैसी महिलाओं का दर्द है कि उनकी पूरी जिंदगी सिर्फ पानी ढोने में बीत गई. अब उनके बच्चों की पढ़ाई भी इस समस्या की भेंट चढ़ रही है. ग्रामीणों में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है. हर घर नल से जल का सरकारी दावा मुड़हरा गांव की जमीनी हकीकत के आगे पूरी तरह दम तोड़ चुका है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *