News Just Abhi परवीन शाकिर उर्दू साहित्य की एक बेहद खूबसूरत, संवेदनशील और बेहद लोकप्रिय शायरा थीं। उन्होंने अपनी शायरी के ज़रिए उर्दू अदब में महिला दृष्टिकोण और उनकी भावनाओं को एक नया और बेहद मज़बूत मुकाम दिया। उन्हें “खुशबू की शायरा” कहा जाता था। उन्होंने एक लड़की और औरत के सच्चे जज्बातों, उसके प्यार, उसकी कशमकश, मानसम्मान और समाज के दोहरे रवैये को बेहद सादगी और गहराई से लिखा। उनकी शायरी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। यहां हम परवीन शाकिर की मशहूर शायरी लेकर आए हैं।

1.बारहा तेरा इंतिज़ार किया
अपने ख़्वाबों में इक दुल्हन की तरह
2.राय पहले से बना ली तू ने
दिल में अब हम तिरे घर क्या करते
3.अब्र बरसे तो इनायत उस की
शाख़ तो सिर्फ़ दुआ करती है
4.शब वही लेकिन सितारा और है
अब सफ़र का इस्तिआरा और है
5.क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला
ज़ख़्म ही ये मुझे लगता नहीं भरने वाला
6.घर आप ही जगमगा उठेगा
दहलीज़ पे इक क़दम बहुत है
7.ज़िंदगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने में रहा करती है
8.जंग का हथियार तय कुछ और था
तीर सीने में उतारा और है
9.रात के शायद एक बजे हैं
सोता होगा मेरा चांद
10. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। बहुत से लोग थे मेहमान मेरे घर लेकिन
वो जानता था कि है एहतिमाम किस के लिए
11.इसी तरह से अगर चाहता रहा पैहम
सुख़नवरी में मुझे इंतिख़ाब कर देगा
12.पास जब तक वो रहे दर्द थमा रहता है
फैलता जाता है फिर आँख के काजल की तरह
13.मसअला जब भी चराग़ों का उठा
फ़ैसला सिर्फ़ हवा करती है
14.गवाही कैसे टूटती मुआमला ख़ुदा का था
मिरा और उस का राब्ता तो हाथ और दुआ का था
15.रफ़ाक़तों का मिरी उस को ध्यान कितना था
ज़मीन ले ली मगर आसमान छोड़ गया
16.क़दमों में भी तकान थी घर भी क़रीब था
पर क्या करें कि अब के सफ़र ही अजीब था
17. हारने में इक अना की बात थी
जीत जाने में ख़सारा और है
18. मैं उस की दस्तरस में हूं मगर वो
मुझे मेरी रज़ा से मांगता है
19. हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानां
दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं
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