राघव चड्ढा के साथ राज्यसभा हाथ से निकली? दिल्ली-पंजाब बचाएं अरविंद केजरीवाल; 66 MLA दांव पर!!


Raghav Chaddha AAP Punjab Government: यूं तो दिल्ली की सत्ता की सुनहरी कालीन बहुत पहले ही ‘आप’ सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के पैरों तले से खिसक गई थी. अब राघव चड्ढा समेत कई सांसदों के एक साथ आम आदमी पार्टी (AAP) को टाटा कहने के बाद संसद में पार्टी की ताकत सिमट गई है. वीकेंड पर आम आदमी पार्टी को लगे भारी झटके के बाद कांग्रेस के नेताओं और बीजेपी सूत्रों के हवाले से ये कहा जा रहा है कि बड़े पैमाने पर सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी के करीब 66 विधायक सेफ गेम खेलते हुए आम आदमी पार्टी, अरविंद केदरीवाल और भगवंत मान को झटका दे सकते हैं.

पंजाब के 50 और दिल्ली के 15 विधायक छोड़ेंगे ‘झाड़ू’?
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा, ‘सांसद गए तो गए. मैं AAP को आगाह करता हूं कि कहीं पंजाब में उनके 50 MLA भी पाला न बदल लें. जब पार्टी बिना किसी स्पष्ट मापदंड के इस तरह से निर्णय लेती है तो ऐसी संभावना हमेशा बनी रहती है.’

दिल्ली का गणित
दिल्ली की विधानसभा में AAP के 22 MLA हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें से कई अपना पिंड पार्टी से छुड़ाना चाहते हैं. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। यानी सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. यानी विधायकी भी बनी रहे और पार्टी से ‘छुट्टा-छुट्टी’ हो जाए. इस गणित से उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए कम से कम 16 का आंकड़ा चाहिए. मतलब, अगर राघव चड्ढा की देखा-देखी उनके करीबी लोग विधायकों को अपने पाले में खींचने में कामयाब हो गए तो केजरीवाल के हाथ से दिल्ली में भी पार्टी का झाड़ू छिटक कर गिर सकता है. सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि दिल्ली की टीम में भी राघव चड्ढा के कई करीबी हैं. ऐसे में दिल्ली से लेकर पंजाब तक बड़ा सियासी ‘खेल’ हो सकता है.

पंजाब का गणित
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं. इसमें AAP के 92 विधायक हैं, यहां बहुमत का आंकड़ा 59 का है. यानी AAP के पास बहुमत से 33 सीटें ज्यादा यानी सुपर मेजोरिटी है. इसलिए पंजाब में इतनी बड़ी टूट तकनीकी रूप से असंभव दिखती है. इस वजह से राजा वडिंग का बयान AAP पर तंज लगता है.

लेकिन राजनीति संभावनाओं का दूसरा नाम है. किसी जमाने में शिवसेना में क्या हुआ, वो दुनिया ने देखा था कैसे 35 से अधिक विधायकों के पाला बदलने से महाराष्ट्र की तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार अल्पमत में आ गई थी. ऐसे में कब क्या हो जाए कोई कुछ नहीं कह सकता.’

इस हिसाब से पंजाब से लेकर दिल्ली तक के चुनावी प्रबंधन की बात करें तो राघव चड्ढा और संदीप कुमार पाठक दोनों के पास जरूरी सूचनाओं से भरा ‘जादुई’ पिटारा है. दिल्ली में ‘आप’ के कुछ नेता ही लगातार एक्टिव मोड में हैं, बाकी सुस्त और नेपथ्य में दिख रहे हैं. सांसदों के पार्टी छोड़ने वाले एपिसोड से आम आदमी पार्टी के अंदर का सियासी तापमान बढ़ा हुआ है. ऐसे में सियासी गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली से लेकर पंजाब तक एक और झटका लग सकता है.

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