Obama Slams Trump: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान युद्ध को लेकर मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। ओहायो में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के समर्थन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ओबामा ने ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक रणनीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब नेता गंभीरता से काम नहीं करते, तो उसकी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ती है।

ओबामा की यह टिप्पणी ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर सामने आई है। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सैन्य हमलों के बजाय कूटनीति का रास्ता अपनाया जा सकता था। अपने कार्यकाल के दौरान हुए परमाणु समझौते का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उस समझौते ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाई थीं।

ओबामा बोले कूटनीति से भी रोका जा सकता था परमाणु खतरा

ओबामा ने ईरान युद्ध के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि शुरुआत में यह तर्क दिया गया था कि सैन्य कार्रवाई का मकसद ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम और परमाणु हथियारों से दूर रखना है। हालांकि, उनके मुताबिक, उनके राष्ट्रपति रहने के दौरान किए गए समझौते ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण रखने का रास्ता तैयार किया था।

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिसाइल दागने की जरूरत नहीं पड़ी थी, बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए समझौता किया गया था। ओबामा ने ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर तंज कसते हुए कहा कि गैरगंभीर रवैये का खामियाजा आखिरकार आम लोगों को भुगतना पड़ता है।

क्या है ईरान परमाणु समझौता?

ओबामा जिस समझौते का जिक्र कर रहे थे, उसे जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन या ईरान परमाणु समझौते के नाम से जाना जाता है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। यह समझौता 2015 में ईरान और अंतरराष्ट्रीय पक्षों के बीच हुआ था। इसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कुछ सीमाएं और निगरानी की व्यवस्था तय की गई थी। इसके बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत देने का प्रावधान था।

हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान 2018 में अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया था। उस समय ट्रंप ने तर्क दिया था कि समझौता ईरान को यूरेनियम संवर्धन जारी रखने की अनुमति देता है और भविष्य में उसे परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंचने से नहीं रोक पाएगा।

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ईरान को लेकर अमेरिका की रणनीति पर बहस

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की नीति लंबे समय से विवाद का विषय रही है। ओबामा प्रशासन ने बातचीत के जरिए परमाणु गतिविधियों पर सीमाएं लगाने की कोशिश की थी, जबकि ट्रंप ने समझौते से हटने के फैसले का बचाव करते हुए इसे अपर्याप्त बताया था।

ओबामा की ताजा टिप्पणी इसी पुराने नीतिगत मतभेद को फिर सामने लाती है। उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही, जबकि ट्रंप प्रशासन की ओर से परमाणु खतरे को लेकर अलग तर्क दिया गया था।

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